इन्वेस्टमेंट कास्टिंग वह प्रक्रिया है जिसमें सिरेमिक शेल में पिघली धातु भरी जाती है और ढलाई के बाद शेल तोड़कर अलग किया जाता है। मोल्ड एक ही बार चलता है और आकार पैटर्न तय करता है। 45 स्टील के लोड-बेयरिंग ब्रैकेट पर इन्वेस्टमेंट कास्टिंग आधा सवाल हल करती है। शेल 180×120×60 mm का बाहरी आकार देता है; 355 MPa का टारगेट, ±0.2 mm होल पिच और 0.1 mm फ्लैटनेस हीट ट्रीटमेंट, कास्ट-ऑन टेस्ट बार और मशीन किए फेस से आते हैं।
इन्वेस्टमेंट कास्टिंग में आकार बनता है: एक बार चलने वाले पैटर्न पर सिरेमिक शेल चढ़ाया जाता है, पैटर्न निकाल दिया जाता है, और शेल में डाला गया स्टील उसके छोड़े खाली स्थान का आकार ले लेता है। ज्यामिति पैटर्न में रहती है, सतह शेल में; टॉलरेंस इनमें से किसी में नहीं रहती।
ब्रैकेट इस बँटवारे को दिखाता है। 8 से 12 mm की दीवार और 25 से 30 mm का बॉस एक ही कास्टिंग में बैठते हैं, यानी 2.5 से 3.75 का सेक्शन अनुपात, और शेल को एक ही ढलाई से दोनों भरने पड़ते हैं। ताक़त का सवाल बॉस से शुरू होता है, क्योंकि वह सबसे बाद में जमता है और सिकुड़ते वक़्त फ़ीड माँगता है।
आकार ही इस चरण की पूरी डिलीवरी है। ड्रॉइंग जो कुछ नापती है, वह शेल उतरने के बाद जुड़ता है।
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शेल पैटर्न के चारों ओर बनता है और ढलाई के बाद तोड़ दिया जाता है।
इन्वेस्टमेंट कास्टिंग परमानेंट मोल्ड प्रक्रिया नहीं है, और यही फ़र्क़ तय करता है कि ड्रॉइंग कैसे लिखी जाए। स्टील डाई दोबारा चलती है और अपनी कैविटी बनाए रखती है, जबकि सिरेमिक शेल नॉकआउट पर टूट जाता है; इसलिए पुर्ज़े के पीछे टिकने वाला औज़ार पैटर्न है, और हर टॉलरेंस को एक कट से आना पड़ता है।
यह चरण फ़िनिशिंग ऑपरेशन भी नहीं है और ताक़त का वादा नहीं करता। यह 180 mm फेस पर 0.1 mm फ्लैटनेस नहीं देता और 355 MPa प्रमाणित नहीं करता; एक आंकड़ा मशीन पर आता है और दूसरा फ़र्नेस पर, जिसका रिकॉर्ड टेस्ट बार है।
जो ड्रॉइंग मोल्ड से ही डेटम फेस और तैयार होल पैटर्न माँगती है, उसने ग़लत प्रक्रिया चुनी है। RFQ से पहले यही सीमा जाँचनी है।
रूट इस क्रम में चलता है: सैंड मोल्ड में ढलाई, गेट काटना, नॉर्मलाइज़िंग या क्वेंच और टेम्पर, पुर्ज़े के साथ टेस्ट बार डालना, Sa 2.5 तक ब्लास्टिंग, माउंटिंग फेस की मशीनिंग, और आख़िर में ड्रॉइंग के हिसाब से फ़िनिश। ख़रीद आदेश इसी क्रम को नियंत्रित करता है।
रूट का नाम और मोल्ड प्लान एक ही मद की तरह पढ़े जाते हैं। ब्रैकेट का कोटेशन इन्वेस्टमेंट कास्टिंग के नाम पर है और प्लान सैंड कास्टिंग रूट पर, एक फ़्लास्क में 2 से 4 पुर्ज़े; इसलिए पैटर्न कटने से पहले शॉप रूट की पुष्टि करती है।
एक आंकड़ा, एक चरण, एक जाँच।
माँग | टारगेट (इकाई) | कहाँ तय होता है | किससे जाँचा जाता है |
|---|---|---|---|
उत्पत्ति शक्ति | ≥355 MPa | हीट ट्रीटमेंट, बार उसी फ़र्नेस लोड में | ASTM A370 टेन्साइल टेस्ट |
बॉडी कठोरता | 220–250 HB | वही हीट ट्रीटमेंट | कठोरता परीक्षण, बिंदु तय होना बाक़ी |
होल पिच | ±0.2 mm | मशीनिंग, ब्लास्टिंग के बाद | सीएमएम (कोऑर्डिनेट मेज़रिंग मशीन) |
फेस फ्लैटनेस | 0.1 mm | मशीनिंग, ब्लास्टिंग के बाद | सीएमएम या सरफ़ेस प्लेट |
सतह की सफ़ाई | Sa 2.5 | ब्लास्टिंग, कट से पहले | कम्पैरेटर प्लेट |
45 स्टील GB/T 699-2015 का मध्यम-कार्बन ग्रेड है, और मानक ग्रेड, उसका रसायन-दायरा और डिलीवरी की हालत तय करता है। ब्रैकेट क्वेंच्ड और टेम्पर्ड मँगाया जाता है, जो किसी सेक्शन की ताक़त नहीं, एक हालत का नाम है।
25 से 30 mm पर यह फ़र्क़ मायने रखता है। ग्रेड का नाम हीट के साथ चलता है, पर बॉस की ताक़त इस पर टिकी है कि वह सेक्शन कितनी तेज़ी से ठंडा हुआ और उसके बाद कौन-सा टेम्पर आया; इसीलिए 355 MPa ड्रॉइंग पर डिज़ाइन टारगेट के रूप में लिखा जाता है। कास्टिंग सामग्री का कॉलआउट ग्रेड और हालत दोनों साथ लिखता है, क्योंकि अकेला कोई एक पुर्ज़े को नहीं बताता।
ग्रेड और हालत लिखने वाला सर्टिफ़िकेट सबूत की ज़ंजीर खोलता है। बंद नहीं करता।
क्वेंचिंग 45 स्टील को 840 से 860 °C तक गर्म करती है और इतनी तेज़ी से ठंडा करती है कि सेक्शन हार्डन हो जाए; टेम्पर उसे 550 से 600 °C तक दोबारा गर्म करता है और उस कठोरता का कुछ हिस्सा टफ़नेस के बदले लेता है। दोनों मिलकर क्वेंच और टेम्पर कहलाते हैं, और इनमें से कोई भी आधा अकेले ताक़त नहीं थामता।
स्वीकृति विंडो 220 से 250 HB है, यानी 30 अंकों की पट्टी, निचली सीमा का क़रीब 14%। पट्टी इतनी चौड़ी है कि फ़र्नेस का फैलाव समा जाए, और इतनी सँकरी कि छूटा हुआ टेम्पर पकड़ में आ जाए। कठोरता ही वह जाँच है जो बॉडी तक पहुँचती है, जहाँ टेन्साइल बार नहीं जा सकता; फिर भी जाँच बिंदुओं की गिनती और स्वीकृति नियम फ़ाउंड्री पर टिके हैं।
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कठोरता कास्टिंग पर नापी जाती है; बार बॉस तक नहीं पहुँच सकता।
कास्ट-ऑन टेस्ट बार वह कूपन है जो ब्रैकेट के साथ उसी हीट से डाला जाता है, उसी फ़र्नेस लोड से गुज़रता है, और आख़िर में ASTM A370 पर खींचा जाता है। यह उस हीट का टेन्साइल रिकॉर्ड है और वही एकमात्र नमूना है जो रूट बनाता है।
एक बार उस हीट को कवर करता है जिससे 2 से 4 पुर्ज़ों के कई फ़्लास्क भर जाते हैं, इसलिए वह फ़र्नेस लोड की तरफ़ से बोलता है, किसी एक कास्टिंग की तरफ़ से नहीं। 25 से 30 mm का बॉस उस दर से ठंडा होता है जो पतला बार कभी नहीं देखता, और एक उदाहरण रिकॉर्ड में बार पास हुआ जबकि बॉडी 355 MPa से चूक गई। सुधार मोटे सेक्शन पर राइज़र, कास्ट-ऑन बार और टेम्पर में बदलाव से आया।
जहाँ ड्रॉइंग को बॉडी का ही सबूत चाहिए, वहाँ कठोरता कास्टिंग पर ही नापनी पड़ती है। मैकेनिकल प्रॉपर्टी टेस्टिंग दोनों जाँचों के पीछे के तरीक़े बताती है।
ISO 8501-1 में Sa 2.5 ब्लास्ट क्लीनिंग की सफ़ाई का ग्रेड है, जिसे कम्पैरेटर प्लेट के सामने तय किया जाता है, और यह खुरदरापन का मान नहीं है। ग्रेड दर्ज करता है कि ब्लास्ट ने कितना मिल स्केल, जंग और पुरानी कोटिंग हटाई; Ra के बारे में वह कुछ नहीं कहता।
इस ब्रैकेट पर यह ग्रेड नाप का फ़ैसला है। ब्लास्टिंग धातु हटाती है, इसलिए वह माउंटिंग फेस कटने से पहले चलती है, और उस दौरान फेस तथा होल मास्क रहते हैं। कट के बाद ब्लास्ट करें, तो कटर अब ±0.2 mm पिच या 0.1 mm फ्लैटनेस तय नहीं करता।
Sa 2.5 ब्लास्टिंग कम्पैरेटर प्लेट पर पास होती है, प्रोफ़ाइलोमीटर पर नहीं। सतह खुरदरापन का कॉलआउट ड्रॉइंग की अलग पंक्ति है, जो तभी चाहिए जब कोटिंग प्रोफ़ाइल माँगे।
डेटम वह फेस है जिससे ड्रॉइंग नापती है, और यहाँ वह मशीन किया माउंटिंग फेस है, उसके बगल वाला कच्चा कास्ट फेस नहीं। कच्चे फेस पर ड्राफ्ट, रेत की बनावट और हीट ट्रीटमेंट का खिसकाव रहता है, इसलिए वह ब्रैकेट को फ़्रेम पर बैठा नहीं सकता।
180 mm फेस पर 0.1 mm फ्लैटनेस 1,800 में क़रीब 1 का ढाल है, और ±0.2 mm का होल पैटर्न किसी भी कच्ची कास्ट सतह से बारीक है। दोनों मशीन किए माउंटिंग फेस पर एक ही सेटअप में बनते हैं और फिर सीएमएम या सरफ़ेस प्लेट पर जाँचे जाते हैं।
खिसकाव कटर पहुँचने से पहले ही स्टॉक ख़र्च कर देता है। अगर 25 से 30 mm का बॉस हीट ट्रीटमेंट में खिसक जाए, तो फेस 0.1 mm पर साफ़ नहीं उतरता; और मशीन पर कितनी भी सावधानी रखें, जो धातु अब मौजूद ही नहीं, वह वापस नहीं आती। कास्टिंग की मशीनिंग उसी स्टॉक भत्ते को कवर करती है।
पैसिवेशन, फॉस्फेटिंग और ब्लैक ऑक्साइड तीन अलग सतह प्रक्रियाएँ हैं, और ड्रॉइंग पर एक शब्द इनमें से एक चुनता है। पैसिवेशन पैसिव फिल्म पर टिका है और स्टेनलेस स्टील का काम है; फॉस्फेटिंग क्रिस्टलीय कन्वर्ज़न कोटिंग बनाती है; ब्लैक ऑक्साइड कार्बन स्टील को रंग देती है, सीमित सुरक्षा के साथ।
इस पुर्ज़े पर कॉलआउट सीधा है: पैसिवेशन ग्राहक की ड्रॉइंग का इंतज़ार करता है, और कार्बन स्टील का सामान्य रास्ता फॉस्फेटिंग या ब्लैक ऑक्साइड है। यह पुष्टि करने वाला कॉलआउट है, शॉप के चुनने लायक़ कोई डिफ़ॉल्ट नहीं। जो सतह फिनिशिंग क्रम कॉलआउट तय होने से पहले शुरू हो, वह आख़िरी निरीक्षण पर रीवर्क पर ख़त्म होता है।
जब शॉप तक दो शब्द पहुँचते हैं — ड्रॉइंग पर पैसिवेशन और ईमेल में फॉस्फेटिंग — तो बैच की जाँच उस प्रक्रिया के सामने होती है जो उसे मिली ही नहीं।
रूट पाँच जगह हारता है। मोटा सेक्शन पूरा हार्डन नहीं हो पाता, माउंटिंग फेस के नीचे सैंड होल या सिकुड़न बैठ सकते हैं, खिसकाव मशीनिंग स्टॉक खा जाता है, ब्लास्टिंग नाप खिसका देती है, और फ़िनिश का कॉलआउट ग़लत प्रक्रिया का नाम लिख सकता है। पाँच में से चार अपने-अपने जाँच चरण पर पकड़ में आ जाते हैं; ताक़त वाला मामला बार पास करके भी बॉडी से चूक सकता है।
जिन पुर्ज़ों पर यह रूट ठीक नहीं बैठता, उनके लिए विकल्प मौजूद हैं। यहाँ दो विकल्प हैं — लॉस्ट-वैक्स पैटर्न और वेल्डेड असेंबली — और दोनों सेक्शन की आज़ादी छोड़कर अलग लागत पर चलते हैं।
मेटल कास्टिंग सप्लाई का एक केस दूसरे पुर्ज़े पर वही ज़ंजीर चलाता है।